प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: घातक चूहनाशक ‘रैटोल पेस्ट’ की बिक्री पर तत्काल रोक

अत्यंत विषैले उत्पादों पर सख्ती, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी दिए गए निर्देश

प्रदेश सरकार ने अत्यंत घातक चूहनाशक उत्पादों, विशेषकर येलो-व्हाइट फास्फोरस युक्त ‘रैटोल पेस्ट’ आदि की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर लिया गया है। सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ऐसे उत्पाद न केवल अवैध हैं बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इस फैसले के तहत उन सभी ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निर्देश जारी किए गए हैं, जहां ये उत्पाद उपलब्ध हैं, कि इन्हें तुरंत अपनी सूची से हटाया जाए।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी कार्रवाई के निर्देश

सरकार ने विशेष रूप से यह पाया है कि कुछ अवैध चूहानाशक उत्पाद ऑनलाइन माध्यमों से बेचे जा रहे थे, जिससे इनके दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे सभी उत्पादों को तुरंत हटाया जाए। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि भविष्य में केवल वही विक्रेता ऑनलाइन कीटनाशक बेच सकेंगे, जिनके पास संबंधित राज्य के लाइसेंसिंग अधिकारी द्वारा जारी वैध लाइसेंस होगा।

कीटनाशी अधिनियम-1968 के नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कीटनाशी अधिनियम-1968 के प्रावधानों के अनुसार देश में केवल उन्हीं कीटनाशी उत्पादों का निर्माण, भंडारण और विक्रय किया जा सकता है, जो ‘केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति’ में पंजीकृत हों। आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार येलो-व्हाइट फास्फोरस (तीन प्रतिशत पेस्ट) युक्त उत्पाद अनुमोदित कीटनाशियों की सूची में शामिल नहीं हैं। ऐसे में इनका किसी भी रूप में निर्माण, भंडारण या बिक्री पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।

येलो फास्फोरस: अत्यंत खतरनाक और बिना एंटीडोट का पदार्थ

सरकारी जानकारी के अनुसार येलो फास्फोरस एक अत्यंत विषैला और ज्वलनशील पदार्थ है, जिसका कोई ज्ञात प्रतिविष (एंटीडोट) उपलब्ध नहीं है। इसकी थोड़ी सी मात्रा का सेवन भी जानलेवा साबित हो सकता है। यही कारण है कि सरकार ने इसके उपयोग और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। ऑनलाइन माध्यमों पर इसकी उपलब्धता से आम लोगों के बीच इसके दुरुपयोग की आशंका भी लगातार बढ़ रही थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

जिलों में सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश

प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि इस प्रतिबंध का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। जिला कृषि रक्षा अधिकारियों और कीटनाशी निरीक्षकों को विशेष रूप से सतर्क रहने के लिए कहा गया है। यदि कहीं भी इन अवैध उत्पादों का भंडारण या बिक्री होती हुई पाई जाती है, तो कीटनाशी अधिनियम 1968 और कीटनाशी नियमावली 1971 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध कीटनाशकों पर नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान

सरकार का यह कदम अवैध और खतरनाक कीटनाशकों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बाजार में केवल अनुमोदित और सुरक्षित उत्पादों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस दिशा में संबंधित विभागों को पूरी सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके।


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