Mumbai PMO Fake Letter Scam: पीएम मोदी के फर्जी हस्ताक्षर से 4 लाख की रंगदारी

Mumbai PMO Fake Letter Scam: पीएम मोदी के फर्जी हस्ताक्षर से 4 लाख की रंगदारी, दो नकली ‘पत्रकार’ गिरफ्तार

PMO के नाम पर ठगी का बड़ा खुलासा

मुंबई में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नाम का इस्तेमाल कर ठगी करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। दो लोगों ने खुद को पत्रकार बताकर एक महिला से 4 लाख रुपये वसूलने की कोशिश की। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़िता ने समय रहते पुलिस से संपर्क किया और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़वा दिया।

इस घटना ने न सिर्फ ठगी के एक नए तरीके को उजागर किया है, बल्कि इसमें देश के प्रधानमंत्री के नाम और हस्ताक्षर के दुरुपयोग ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल की कार्रवाई

मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन यूनिट ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान तौसीफ हुसैन इस्माइल पटेल और सिद्धिनाथ दीनानाथ पांडे उर्फ सुनील के रूप में हुई है। दोनों गोरेगांव (पश्चिम) क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता बनीं ठगी का शिकार

शिकायतकर्ता एक एनजीओ संचालक हैं, जो वंचित बच्चों, वृद्धों और जरूरतमंदों के लिए काम करती हैं। उनकी संस्था कई वर्षों से सामाजिक सेवा में सक्रिय है।

आरोपियों से उनकी मुलाकात एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई थी, जहां उन्होंने खुद को मीडिया से जुड़ा बताया और धीरे-धीरे विश्वास हासिल कर लिया।

व्हाट्सएप से शुरू हुई साजिश

आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए संपर्क बनाए रखा और धीरे-धीरे पीड़िता को अपने झांसे में लिया। एक दिन उन्होंने वॉयस मैसेज भेजकर प्रधानमंत्री कार्यालय से विशेष बधाई पत्र दिलाने का प्रस्ताव रखा।

शुरुआत में पीड़िता को यह प्रस्ताव संदिग्ध लगा, लेकिन आरोपियों ने इसे असली बताकर पैसे की मांग शुरू कर दी।

फर्जी हस्ताक्षर वाला पत्र बनाकर किया भ्रमित

कुछ दिनों बाद आरोपियों ने प्रधानमंत्री के नाम से एक बधाई पत्र भेजा, जिसमें पीड़िता के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की गई थी। इसे देखकर कुछ समय के लिए पीड़िता को विश्वास हो गया।

हालांकि बाद में लोगों ने पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए, जिसके बाद उन्होंने इसे सोशल मीडिया से हटा दिया।

फर्जी ईमेल के जरिए बनाया दबाव

आरोपियों ने पीड़िता के नाम से एक नकली ईमेल आईडी भी तैयार की, ताकि पूरा मामला असली लगे। इसके जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि उनका संपर्क सीधे पीएमओ से है।

लगातार दबाव और भरोसा दिलाने की कोशिशों के बीच उन्होंने पैसे देने के लिए मानसिक दबाव बनाया।

कैफे में बुलाकर मांगे पैसे

आरोपियों ने पीड़िता को वर्ली स्थित एक कैफे में बुलाया और वहां दोबारा 4 लाख रुपये की मांग की। उन्होंने दावा किया कि वे असली पत्र दिलवा सकते हैं और उनके ऊंचे स्तर पर संपर्क हैं।

पुलिस ने जाल बिछाकर किया गिरफ्तार

पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने योजना बनाकर आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

जैसे ही आरोपी पैसे लेने पहुंचे, उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

बरामद हुए अहम सबूत

पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, नकली नोटों के बंडल, कुछ असली नकदी और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये सभी चीजें ठगी के इस नेटवर्क में इस्तेमाल की जा रही थीं।

कानूनी कार्रवाई और जांच जारी

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश भी जारी है।

पहले भी हो सकती है ऐसी ठगी

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है। यदि ऐसा सामने आता है, तो इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।


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