हैवानियत की हदें पार: मिर्जापुर क्षेत्र में झाड़ियों में मिला नवजात का क्षत-विक्षत शव

घटना से क्षेत्र में फैली सनसनी
मिर्जापुर–सहारनपुर थाना मिर्जापुर क्षेत्र के गांव अलीपुरा भागुवाला के जंगल में शुक्रवार देर शाम एक नवजात शिशु का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने जब झाड़ियों के बीच फेंके गए इस नवजात के शव को देखा तो उनके होश उड़ गए। कलेजा चीर देने वाला यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्रित हो गए।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही मिर्जापुर थाने के एसएसआई बांके लाल और महिला उपनिरीक्षक दीक्षा कुमारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने पहुंचकर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की और नवजात के शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत फोरेंसिक टीम को भी बुलाया। टीम ने मौके पर पहुंचकर झाड़ियों और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। प्रथम दृष्टया यह मामला क्रूरतापूर्वक नवजात शिशु को जंगल में फेंकने का प्रतीत हो रहा है। फोरेंसिक टीम ने हर एंगल से जांच शुरू की है ताकि यह पता चल सके कि बच्चे को यहां कैसे और किन परिस्थितियों में छोड़ा गया।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
पुलिस ने नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों और समय की स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी। फिलहाल पुलिस आसपास के इलाकों में लगातार पूछताछ कर रही है ताकि किसी भी तरह की जानकारी मिल सके जो जांच में सहायक हो।
स्थानीय लोगों में रोष और चिंता
घटनास्थल पर जुटे ग्रामीणों में भारी रोष और दुख देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह बच्चियों को फेंक देना समाज की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकारें बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चला रही हैं, लेकिन ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि मानसिकता बदलने की अभी भी बेहद ज़रूरत है। ग्रामीणों ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों की पहचान जल्द हो सके और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
चिकित्सा सहायता देने का प्रयास, लेकिन बचाई न जा सकी जान
ग्रामीणों के सहयोग से नवजात को चिकित्सा सहायता दिलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे बचाया नहीं जा सका। बच्चे की हालत इतनी खराब थी कि डॉक्टर भी उसे नहीं बचा सके। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और लोग इस क्रूरता की निंदा कर रहे हैं।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने मामले में जांच-पड़ताल शुरू कर दी है और विभिन्न एंगल से सुराग तलाशे जा रहे हैं। आसपास के गांवों में पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि यह नवजात कहां से लाया गया और किसने उसे जंगल में फेंका। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक सोच पर गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर समाज में फैली गलत धारणाओं और घटती संवेदनशीलता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक समाज अपनी सोच नहीं बदलेगा, तब तक बेटी बचाओ जैसे अभियान अधूरे रहेंगे। लोगों ने सरकार से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।
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