Lucknow Green Corridor Controversy
Lucknow Green Corridor Controversy: अखिलेश यादव का योगी सरकार पर बड़ा हमला, डिजाइन और 7000 करोड़ बजट पर उठाए सवाल

लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर पर सियासी संग्राम तेज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बन रहे ग्रीन कॉरिडोर को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस परियोजना पर तीखा हमला बोलते हुए इसे विकास के बजाय अव्यवस्था का प्रतीक बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे सड़क का डिजाइन खुद मुख्यमंत्री द्वारा तैयार किया गया हो, जो पूरी तरह से अव्यावहारिक है।
'ग्रीन कॉरिडोर' या 'बर्बाद कॉरिडोर'?
अखिलेश यादव ने इस परियोजना को लेकर सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए इसे "ग्रीन कॉरिडोर" के बजाय "बर्बाद कॉरिडोर" करार दिया। उनका कहना है कि सरकार ने पहले से बनी हुई सड़कों के बीच छोटे-छोटे चौराहे जोड़कर उसे एक नई परियोजना का नाम दे दिया है। उनके अनुसार, इस तरह का निर्माण न तो ट्रैफिक को सुगम बनाता है और न ही शहर के विकास में कोई वास्तविक योगदान देता है।
डिजाइन पर उठे गंभीर सवाल
सपा अध्यक्ष ने कॉरिडोर की डिजाइनिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस कॉरिडोर को तैयार किया गया है, वह पूरी तरह से भ्रमित करने वाला है। जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जिससे वाहन चालकों को समझ ही नहीं आता कि किस दिशा में जाना है। उनका आरोप है कि ऐसी डिजाइनिंग किसी भी आधुनिक इंजीनियरिंग के मानकों पर खरी नहीं उतरती।
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वाहन चालकों के लिए मुश्किल भरा सफर
अखिलेश यादव ने कहा कि इस कॉरिडोर पर वाहन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस सड़क पर तेज चलना तो दूर, सामान्य गति से चलना भी मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक, डिजाइन की खामियों के कारण ट्रैफिक व्यवस्था और अधिक जटिल हो गई है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
7000 करोड़ के बजट पर सवाल
इस परियोजना के लिए निर्धारित लगभग 7000 करोड़ रुपये के बजट को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद परिणाम संतोषजनक नहीं हैं। उनके अनुसार, यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है, क्योंकि इतनी बड़ी लागत के बावजूद सड़क की गुणवत्ता और उपयोगिता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
पैदल यात्रियों के लिए नहीं छोड़ा गया रास्ता
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस परियोजना में पैदल चलने वालों के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान आम नागरिकों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। इससे यह साफ होता है कि योजना बनाते समय केवल दिखावे पर ध्यान दिया गया, न कि वास्तविक उपयोगिता पर।
इंजीनियरिंग पर उठे सवाल, जवाबदेही की मांग
सपा अध्यक्ष ने इस कॉरिडोर को डिजाइन करने वाले इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति या टीम ने इस परियोजना की डिजाइन तैयार की है, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में पारदर्शिता लाई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सरकार पर विकास के नाम पर आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार विकास के नाम पर केवल दिखावा कर रही है। उनका कहना है कि वास्तविक सुधार करने के बजाय ऐसी परियोजनाएं लाई जा रही हैं, जो जनता के लिए और अधिक समस्याएं पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के बजाय उसे और अधिक जटिल बनाया जा रहा है।
भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, सत्ता पक्ष ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा का कहना है कि अखिलेश यादव को प्रदेश में हो रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से परेशानी हो रही है। उनके अनुसार, ग्रीन कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो शहर के ट्रैफिक को सुगम बनाने में मदद करेगी और आने वाले समय में जनता को इसका लाभ मिलेगा।
ट्रैफिक सुधार बनाम सियासी विवाद
ग्रीन कॉरिडोर को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे ट्रैफिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अव्यवस्था और संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण बता रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जो आने वाले समय में और अधिक तेज हो सकता है।
जनता के बीच बढ़ती चर्चा
इस विवाद के बाद आम जनता के बीच भी इस परियोजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी लागत से बनी यह परियोजना वास्तव में उनके लिए कितनी उपयोगी साबित होगी। साथ ही, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह के विकास कार्य वास्तव में शहर की समस्याओं का समाधान कर पाएंगे।
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