ठोस सबूतों के साथ लखनऊ में 200 करोड़ के कोडीन कफ सिरप की तस्करी का नया खुलासा
लखनऊ/सहारनपुर: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने 200 करोड़ रुपये मूल्य के कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के मामले में अहम छापेमार कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सुशांत गोल्फ सिटी थाना लखनऊ में दर्ज एफआईआर संख्या 182/2024 के तहत यह मामला दर्ज किया गया था और एसटीएफ ने मामले की जांच में मिले ठोस सुरागों के आधार पर कार्रवाई कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद अपने साथ लखनऊ ले गई।
एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये के कफ सिरप की खरीद-फरोख्त को वैध दिखा रहा था और बीते समय में इन दवाओं को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक तस्करी करने का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों व फर्मों के सहारे कच्चे माल व दवा के चलन को निजी और व्यवसायिक लेनदेन के रूप में रिकार्ड कर रहे थे ताकि सच्ची गतिविधियों को छुपाया जा सके।
सहारनपुर के शास्त्री नगर से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में श्री राम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभोर राणा पुत्र गजराज सिंह (पता: 2सी/3926ए निकट गन्ना भवन, शास्त्री नगर), उनके भाई विशाल पुत्र गजराज सिंह (2सी/3926ए निकट गन्ना भवन, शास्त्री नगर), तथा बिट्टू पुत्र स्व. हरदेवा और सचिन पुत्र स्व. हरदेवा (उभय का पता: 49ए अनमोल विहार कॉलोनी, शिव मंदिर के पास) शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया और उन्हें अपने साथ लखनऊ ले गई।
आरोपियों के विरुद्ध थाना सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में अपराध संख्या 182/2024 के तहत धारा 420 (ठगी), 467 (जालसाजी से संबंधित गंभीर धाराएँ), 468, 471, 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 34 (साझा जिम्मेदारी) और 201 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इन धाराओं का चयन दर्शाता है कि जांचकर्ता मामले को फर्जी दस्तावेजी प्रक्रिया, आपराधिक साजिश व साझा संलिप्तता के संदर्भ में देख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि विभोर राणा का नाम पहले भी जांच में आया था—कुछ समय पूर्व विदेश भागने के प्रयास के दौरान उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, 4 नवंबर को गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में इसी प्रकार की कफ सिरप तस्करी से संबंधित एक और मुकदमा (अपराध संख्या 691/2025) दर्ज किया गया था, जिसमें सहारनपुर के अभिषेक शर्मा का भी नाम शामिल था। इन पिछली घटनाओं व नए खुलासे के बीच संबंध तलाशने के उद्देश्य से जांच तंत्र ने मौजूदा ठोस सुरागों को जोड़कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।
सूत्रों का कहना है कि इस शाखित जांच के बाद राणा परिवार की संपत्तियों की भी पड़ताल की संभावना है। विशेषकर पिछले चार वर्षों के दौरान राणा परिवार द्वारा खरीदी या बेची गई जमीनों और संपत्तियों के रिकार्ड पर एसटीएफ की नजर हो सकती है, ताकि यह देखा जा सके कि कहीं अवैध स्रोतों से अर्जित धन से संपत्ति खरीदने का प्रयत्न तो नहीं हुआ।
एसटीएफ द्वारा की गई यह कार्रवाई न सिर्फ एक स्थानीय घटना है बल्कि इससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश से होते हुए पश्चिम बंगाल और उसके बाद बांग्लादेश तक विस्तारित कफ सिरप तस्करी का एक व्यापक नेटवर्क सक्रिय था। मामलों के आपसी संबंधों और आरोपियों के संलिप्त नेटवर्क की तह तक जाने के लिए आगे की कानूनी व तकनीकी जांच जारी है। फिलहाल गिरफ्तार चारों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और जांच अधिकारी मामले की और परतें खोलने की कोशिश में हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े सत्यापन, कोर्ट की कार्यवाही तथा एसटीएफ की आगे की कार्रवाइयों के बारे में जैसे ही आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, उसे रिपोर्ट किया जाएगा।
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