खून की कमी से बचाव का दावा: 3 महीने ‘काला चना’ खाने की सलाह चर्चा में

आयरन और फोलेट का पावरहाउस बताया जा रहा काला चना
खून की कमी (एनीमिया) से जिंदगी भर बचने के लिए इन दिनों काला चना खाने की सलाह तेजी से चर्चा में है। बताया जा रहा है कि काला चना आयरन, फोलेट (Folate) और प्रोटीन का पावरहाउस है। फोलेट और आयरन मिलकर तेजी से नए रेड ब्लड सेल्स (RBC) और हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करते हैं। दावा यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति 3 महीने तक लगातार काला चना खाता है तो शरीर का आयरन रिज़र्व (Ferritin) भर जाता है और खून की कमी दूर हो सकती है।
वैज्ञानिक कारण: हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक
बताए गए वैज्ञानिक कारणों के अनुसार, काला चना आयरन से भरपूर होता है, जो हीमोग्लोबिन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फोलेट नए रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद मैग्नीशियम थकान को कम करने में सहायक बताया गया है। दावा है कि नियमित सेवन से व्यक्ति अधिक ऊर्जावान और सक्रिय महसूस कर सकता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: ‘बल्य’ और ‘रक्त-वर्धक’ आहार
आयुर्वेद के अनुसार चना ‘बल्य’ यानी ताकत देने वाला और ‘रक्त-वर्धक’ माना गया है। यह शरीर को फौलादी बनाने और ‘मांस’ धातु को पुष्ट करने में सहायक बताया जाता है। जो लोग खुद को घोड़े की तरह फुर्तीला और ताकतवर बनाए रखना चाहते हैं, उनके लिए इसे उत्तम ‘पोषक आहार’ कहा गया है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार नियमित सेवन से शरीर में स्थायी मजबूती आती है।
दावे किए गए फायदे: नो एनीमिया से लेकर सुपर स्टैमिना तक
काला चना खाने से जुड़े कई फायदे बताए जा रहे हैं। पहला दावा है कि इससे जिंदगी भर खून की कमी नहीं होगी। दूसरा, चेहरे पर लाली बनी रहेगी और पीलापन खत्म होगा, जिससे त्वचा हेल्दी दिखेगी। तीसरा, शरीर में सुपर स्टैमिना आएगा और व्यक्ति काम करते समय थकान महसूस नहीं करेगा। इसे ‘सुपरफूड’ और ‘फिटनेस फ्यूल’ के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।
फॉलो करने की विधि: कैसे और कब खाएं काला चना
काला चना खाने की एक निश्चित विधि भी बताई गई है।
एक मुट्ठी काले चने रात को पानी में भिगो दें। सुबह इन्हें उबालकर (Boiled) या अंकुरित (Sprouted) करके नाश्ते में खाएं। साथ में थोड़ा नींबू जरूर निचोड़ें, क्योंकि विटामिन C आयरन के अवशोषण में मदद करता है।
बताया गया है कि सुबह के समय सेवन करना अधिक लाभकारी है। उबले या अंकुरित रूप में खाने से पाचन बेहतर रहता है और पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी होता है।
कब और क्यों न खाएं काला चना
जहां एक ओर इसके फायदे बताए जा रहे हैं, वहीं कुछ सावधानियां भी सामने आई हैं। कहा गया है कि काला चना गैस (वात) बहुत बनाता है, इसलिए इसे बिना अच्छे से चबाए या बिना जीरा और हींग के नहीं खाना चाहिए। यह भी सलाह दी गई है कि रात के समय काला चना न खाएं, क्योंकि यह पचने में भारी होता है और पेट में असहजता पैदा कर सकता है।
इसलिए जिन लोगों को पहले से गैस, अपच या पेट संबंधी समस्या है, उन्हें सेवन से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
3 महीने का दावा: क्या सचमुच भर जाता है आयरन रिज़र्व?
बताया जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार तीन महीने तक काला चना खाता है तो उसके शरीर का आयरन रिज़र्व यानी फेरिटिन स्तर भर जाता है। इससे हीमोग्लोबिन सामान्य रहने में मदद मिलती है और एनीमिया का खतरा कम होता है। हालांकि यह दावा सामान्य सलाह के रूप में सामने आ रहा है और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार परिणाम अलग हो सकते हैं।
निष्कर्ष: संतुलित सेवन और सही समय है जरूरी
काला चना आयरन, फोलेट और प्रोटीन से भरपूर आहार माना जा रहा है। सुबह भिगोकर, उबालकर या अंकुरित रूप में नींबू के साथ सेवन करने की सलाह दी गई है। वहीं रात में खाने से बचने और पाचन के लिए जीरा-हींग का उपयोग करने की भी सलाह है। एनीमिया से बचाव के दावे के साथ इसे एक सशक्त पोषक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
Disclaimer
यह समाचार जनसामान्य में प्रचलित दावों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या एनीमिया के उपचार के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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