
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य
बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स–आईपीआर) विषय पर विद्यालय और उच्च शिक्षा के स्तर के बीच अकादमिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “बौद्धिक संपदा अधिकार: विद्यालय शिक्षा से उच्च शिक्षा तक” रहा। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र यह रहा कि विद्यार्थियों को नवाचार, मौलिक चिंतन और शोध के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाए तथा उन्हें आईपीआर की अवधारणा से अवगत कराया जाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता में व्यक्त विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की निदेशक डॉ. अंजू वालिया ने की। उन्होंने संगोष्ठी की थीम प्रस्तुत करते हुए कहा कि रचनात्मकता और नवाचार की नींव विद्यालय स्तर पर ही रखी जाती है, जिसे आगे उच्च शिक्षा में शोध, पेटेंट और उद्यमिता के माध्यम से विकसित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आईपीआर न केवल विद्यार्थियों को अपने विचारों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करता है, बल्कि शैक्षणिक ईमानदारी और मौलिक सोच को भी प्रोत्साहित करता है।
मुख्य अतिथि का महत्वपूर्ण संदेश
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला विद्यालय निरीक्षक, सहारनपुर डॉ. अरविंद के. पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि विचारों का संरक्षण ही ज्ञान-आधारित समाज की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं के नवीन और मौलिक विचारों पर निर्भर करती है। इसलिए विद्यार्थियों को बचपन से ही रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।

पद्मश्री सम्मानित शिक्षाविद का आह्वान
कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित डॉ. सेठपाल सिंह ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में मौलिक सोच विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें नए विचारों को सामने लाने, प्रयोग करने और नवाचार के लिए प्रेरित करें।
नवाचार एवं पेटेंट की अहमियत पर विशेषज्ञ का संबोधन
शिक्षाविद् प्रो. अनुराग कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में नवाचार और पेटेंट की महत्ता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी मौलिक विचार को पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि नवाचार तभी सार्थक कहा जा सकता है जब उसे पेटेंट के माध्यम से सुरक्षित किया जाए। इससे शोधकर्ता और विद्यार्थी अपने विचारों को न केवल व्यावसायिक स्तर पर बल्कि सामाजिक उपयोग के लिए भी आगे बढ़ा सकते हैं।

तकनीकी विशेषज्ञ की दृष्टि से आईपीआर का महत्व
तकनीकी विशेषज्ञ इंजीनियर प्रशांत के. त्यागी ने कहा कि आईपीआर नवाचार आधारित राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यदि विद्यार्थी अपने नवीन विचारों की सुरक्षा के महत्व को समझ जाएँ, तो भविष्य में देश को तकनीकी और बौद्धिक स्तर पर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी।
कार्यक्रम का संचालन एवं रिपोर्ट प्रस्तुति
संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुति डॉ. पंकज द्वारा की गई। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, चर्चाएं और निष्कर्ष विस्तृत रूप से प्रस्तुत किए। वहीं कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। उनके संचालन में सभी वक्ताओं के विचारों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया।
एनईपी 2020 के संदर्भ में चर्चाएं
संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत नवाचार, शोध एवं अनुभवात्मक शिक्षा में आईपीआर की भूमिका पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को पारंपरिक पुस्तक आधारित शिक्षा से आगे ले जाकर अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में मार्गदर्शित करती है। इस दिशा में आईपीआर एक सशक्त माध्यम है।

विस्तृत सहभागिता और सफल आयोजन
संगोष्ठी में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक, प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन आशीष शर्मा द्वारा किया गया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए संगोष्ठी को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।