पश्चिम एशिया तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला: रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश, घरेलू सप्लाई को दी प्राथमिकता

नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक फ्यूल सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों को देखते हुए भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की सभी तेल रिफाइनरियों को तुरंत प्रभाव से एलपीजी (LPG) उत्पादन बढ़ाने और इसे प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
घरेलू गैस उपभोक्ताओं की सप्लाई सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता
मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारत में लगभग 330 मिलियन घरेलू एलपीजी कनेक्शन धारक हैं। इन सभी उपभोक्ताओं तक बिना किसी रुकावट के गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी करें और अतिरिक्त उत्पादन को सीधे घरेलू वितरण चैनलों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।
सरकार का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो वैश्विक सप्लाई में उतार-चढ़ाव का असर देश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। इसलिए यह निर्णय एहतियात के तौर पर लिया गया है ताकि देश में कुकिंग गैस की उपलब्धता पूरी तरह से स्थिर बनी रहे।
बुकिंग सिस्टम में बदलाव, जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती
एलपीजी सिलेंडर की संभावित कमी की अफवाहों और ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग सिस्टम में भी बदलाव किया है। मंत्रालय के अनुसार अब घरेलू ग्राहकों के लिए दो रिफिल बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले यह अवधि कम थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि कोई भी उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अधिक सिलेंडर बुक न कर सके। इस फैसले का उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और देशभर में गैस सिलेंडर की सप्लाई का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।
एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट के तहत सप्लाई को किया जाएगा रेगुलेट
सरकार ने फ्यूल सप्लाई को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट, 1955 लागू करने का निर्णय लिया है।
इस कानून के तहत सरकार को आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार मिलता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि देश में ईंधन की समान और स्थिर उपलब्धता बनी रहे तथा किसी भी तरह की जमाखोरी या सप्लाई बाधा को रोका जा सके।
हॉस्पिटल और शैक्षणिक संस्थानों को मिलेगी प्राथमिकता
पेट्रोलियम मंत्रालय ने नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर के लिए भी नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाओं को एलपीजी सप्लाई में प्राथमिकता दी जाएगी।
मंत्रालय ने कहा है कि इन संस्थानों के लिए इम्पोर्टेड एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी ताकि उनकी सेवाएं किसी भी परिस्थिति में प्रभावित न हों। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े संस्थानों को ऊर्जा आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आनी चाहिए।
सप्लाई मॉनिटरिंग के लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी
कमर्शियल सेक्टर और अन्य उद्योगों में एलपीजी सप्लाई पर निगरानी रखने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (EDs) की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
यह कमेटी देशभर में गैस की उपलब्धता और मांग का नियमित आकलन करेगी। इसके आधार पर ही कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में एलपीजी वितरण से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस तरह की निगरानी व्यवस्था से सप्लाई मैनेजमेंट अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगा।
पेट्रोलियम मंत्री ने देशवासियों को दिया भरोसा
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मौजूदा स्थिति पर स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत की ऊर्जा रणनीति पूरी तरह लचीली और मजबूत है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत ऐसे वैकल्पिक मार्गों से ऊर्जा आयात कर रहा है जिन पर मौजूदा युद्ध क्षेत्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हर संभव सक्रिय कदम उठा रही है। मंत्री के अनुसार सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के नागरिकों को किसी भी परिस्थिति में ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
एक्सपर्ट्स ने फैसले को बताया समय पर उठाया गया कदम
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम काफी महत्वपूर्ण और समय पर लिए गए निर्णय हैं। उनके अनुसार इससे न केवल घरेलू कुकिंग गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय बाजार पर सीमित रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, बुकिंग सिस्टम में बदलाव और सप्लाई पर निगरानी रखने जैसे कदमों से देश में गैस वितरण व्यवस्था अधिक संतुलित और प्रभावी बन सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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