गंगोह में पान मसाला, गुटखा और सिगरेट की कालाबाजारी तेज, पुराने स्टॉक पर भी वसूले जा रहे अधिक दाम

बाजार में तय मूल्य से अधिक कीमत वसूली का आरोप
गंगोह में पान मसाला, गुटखा और सिगरेट की कालाबाजारी जोरों पर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। छोटे दुकानदारों का आरोप है कि बड़े थोक एवं एजेंसी धारक व्यापारी निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर माल बेच रहे हैं। खास बात यह है कि पुराने स्टॉक, जिन पर पुराना एमआरपी अंकित है, उन्हें भी संभावित नए बढ़े हुए दामों पर बेचा जा रहा है। इससे बाजार में असंतोष की स्थिति बन गई है और उपभोक्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है।
पुराने प्रिंट और पुराने एमआरपी वाले माल की ब्लैक में बिक्री का आरोप
छोटे दुकानदारों का कहना है कि विभिन्न ब्रांड के बाहुबली, दिलबाग, कमलापसंद सहित अन्य गुटखा और पान मसाला के पुराने प्रिंट और पुराने एमआरपी वाले माल को थोक व्यापारी छिपाकर रख रहे हैं। आरोप है कि इन्हें संभावित बढ़े हुए दामों के हिसाब से ब्लैक में बेचा जा रहा है। पैकेट पर अंकित मूल्य कम होने के बावजूद दुकानदारों से अधिक कीमत वसूली जा रही है। इस तरह पुराने स्टॉक को भी नए रेट के नाम पर बाजार में उतारा जा रहा है।
छोटे दुकानदारों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें तय रेट से ज्यादा कीमत पर सामान दिया जा रहा है। मजबूरी में वे भी ग्राहकों से एक-दो रुपये अधिक वसूलने को विवश हो रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार यदि वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें घाटा उठाना पड़ता है। इससे छोटे दुकानदारों और ग्राहकों दोनों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। दुकानदारों का यह भी कहना है कि पूरी अतिरिक्त राशि थोक व्यापारियों के पास जा रही है, जबकि बदनामी और नाराजगी का सामना उन्हें करना पड़ रहा है।
बाजार में कमी की अफवाह से कालाबाजारी को बढ़ावा
बताया जा रहा है कि बाजार में जानबूझकर कमी की अफवाह फैलाई जा रही है। इससे यह संदेश दिया जा रहा है कि माल की उपलब्धता कम है और आगे कीमतें बढ़ सकती हैं। इसी का फायदा उठाकर अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। छोटे व्यापारियों का आरोप है कि इस तरह कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बिना बिल के बिक्री का आरोप
अधिकांश मामलों में बिल न देने की भी शिकायतें सामने आई हैं। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें कई बार बिना बिल के माल दिया जाता है, जिससे अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलता है। बिल न होने की स्थिति में वे अपनी शिकायत या हिसाब-किताब का कोई ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं कर पाते। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे व्यापारिक तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
निर्धारित कीमत और वसूली गई कीमत में बड़ा अंतर
छोटे दुकानदारों के अनुसार विभिन्न उत्पादों की तय कीमत और वसूली जा रही कीमत में काफी अंतर है। दुकानदारों ने बताया कि कमलापसंद 165 रुपये, दिलबाग 380 रुपये, बाहुबली 125 रुपये, कुलिप 240 रुपये, चैनीखैनी 240 रुपये, सिगरेट रिफाइन 165 रुपये, छोटी गोल्ड फ्लैक 80 रुपये, बड़ी गोल्ड फ्लैक 87 रुपये, सफल 165 रुपये और हाथीगोला 130 रुपये के हिसाब से है।
वहीं उनका कहना है कि औसतन होलसेलर कमलापसंद 210 रुपये, दिलबाग 620 रुपये, बाहुबली 165 रुपये, कुलीप 340 रुपये, चैनीखैनी 300 रुपये, सिगरेट रिफाइन 350 रुपये, छोटी गोल्ड फ्लैक 105 रुपये, बड़ी गोल्ड फ्लैक 100 रुपये, सफल 210 रुपये और हाथीगोला 140 रुपये प्रति पैकेट दुकानदारों को दे रहे हैं। इस अंतर से स्पष्ट है कि कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि कर वसूली की जा रही है।
ग्राहकों में भारी रोष
जब ग्राहक पैकेट पर अंकित मूल्य और बाजार में वसूली जा रही कीमत के बीच अंतर देखते हैं तो वे विरोध जताते हैं। खासकर पुराने स्टॉक को भी नए बढ़े हुए दामों पर बेचे जाने को लेकर ग्राहकों में असंतोष है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि पैकेट पर अंकित मूल्य कम है तो अधिक कीमत वसूलना गलत है। इस स्थिति से ग्राहक और दुकानदार दोनों असहज महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बढ़ोतरी और कालाबाजारी की जानकारी प्रशासन को है। यदि जानकारी है तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो बाजार में कालाबाजारी और तेज हो सकती है। इससे प्रशासन की छवि भी प्रभावित हो रही है।
कानूनी उल्लंघन का आरोप
छोटे दुकानदारों और उपभोक्ताओं का कहना है कि यह कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन है। निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली और बिना बिल के व्यापार को अवैध बताया जा रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो संबंधित विभाग द्वारा जांच और कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
छोटे व्यापारियों की मांग
छोटे दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन बाजार की जांच करे और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली पर रोक लगाए। उनका कहना है कि वे भी नियमों के तहत व्यापार करना चाहते हैं, लेकिन थोक स्तर पर बढ़े दामों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं हुआ तो छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो सकता है।
आगे क्या कदम उठाए जाएंगे
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यदि जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो बाजार में असंतोष और कालाबाजारी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Disclaimer:
यह समाचार स्थानीय दुकानदारों और उपभोक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। प्रशासनिक जांच के बाद तथ्य बदल सकते हैं।
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