
सहारनपुर में बढ़ते कोहरे का स्वास्थ्य पर असर
सहारनपुर। जिले में सुबह और शाम के समय लगातार बढ़ रहे कोहरे और कड़ाके की ठंड ने सांस (अस्थमा) और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ठंडे मौसम के साथ वातावरण में नमी बढ़ने से सांस की नलियों पर सीधा असर पड़ रहा है, जिसके चलते मरीजों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।
ठंडी और नम हवा से सिकुड़ जाती है सांस की नली
नगर के विख्यात चिकित्सक डॉक्टर संजीव मिगलानी ने बताया कि ठंड और कोहरे की वजह से हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे सांस की नली सिकुड़ने लगती है। इसका सीधा असर अस्थमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ता है। ऐसे मौसम में सांस लेने में तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं।
अस्थमा के मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम भरा मौसम
डॉक्टर संजीव मिगलानी के अनुसार कोहरे की ठंड अस्थमा के मरीजों के लिए अत्यधिक जोखिम भरी होती है। ठंडी हवा सांस की नलियों में सूजन पैदा कर देती है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। यही कारण है कि सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता होती है और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सांस के मरीजों में दिखाई देने वाले प्रमुख लक्षण
डॉक्टर संजीव मिगलानी ने बताया कि कोहरे और ठंड के दौरान सांस के मरीजों में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं। इनमें गले में लगातार खिच-खिच की आवाज आना, खांसी के साथ सांस का फूलना, सीढ़ियां चढ़ते समय या घर का काम करते समय सांस फूलना प्रमुख हैं। इसके अलावा हाथ-पैर की उंगलियों या जीभ का नीला पड़ना भी गंभीर संकेत माना जाता है।
छाती से सीटी जैसी आवाज आना है खतरनाक संकेत
उन्होंने बताया कि यदि मरीज की छाती से सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने लगे, तो यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। कई बार मरीज सांस के साथ 1 से 10 तक गिनती भी नहीं बोल पाता, जो ऑक्सीजन की कमी का संकेत है। सांस फूलने के साथ हाथ-पैरों में सूजन आना भी गंभीर लक्षणों में शामिल है।
गंभीर अवस्था में मरीज स्टेज-4 तक पहुंच सकता है
डॉक्टर संजीव मिगलानी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो सांस के मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। गंभीर मामलों में मरीज स्टेज-4 तक पहुंच सकता है, जहां वह गफलत की अवस्था में चला जाता है। इस स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता बेहद जरूरी होती है।
कोहरे के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह
बचाव को लेकर डॉक्टर संजीव मिगलानी ने कहा कि सांस के मरीजों को सुबह और शाम के समय कोहरे में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि किसी कारणवश बाहर निकलना जरूरी हो, तो मास्क पहनकर ही जाएं ताकि ठंडी और नम हवा सीधे सांस की नलियों तक न पहुंचे।
इनहेलर और दवाएं नियमित लेना जरूरी
उन्होंने बताया कि सांस के मरीजों को इनहेलर और सांस की कैप्सूल डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से लेनी चाहिए। दवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही मरीज की हालत को बिगाड़ सकती है। नियमित दवा से सांस की नलियों में सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है।
भाप लेना और गर्म कपड़े पहनना फायदेमंद
डॉक्टर संजीव मिगलानी के अनुसार दिन में 3 से 4 बार भाप लेना सांस के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इससे सांस की नलियां खुलती हैं और जकड़न कम होती है। इसके साथ ही सर्दियों में बाहर निकलने से पहले गर्म कपड़े अच्छी तरह पहनना भी बेहद जरूरी है।
मौसम को हल्के में न लें सांस के मरीज
डॉक्टर संजीव मिगलानी ने कहा कि सांस के मरीज इस मौसम को बिल्कुल भी हल्के में न लें। समय पर दवा, आवश्यक सावधानी और डॉक्टर की सलाह का पालन करके ही सर्दियों के मौसम में खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। थोड़ी-सी सतर्कता मरीजों को बड़ी परेशानी से बचा सकती है।