
देहरादून में मारपीट, धमकी, हथियार लहराने, तिरंगे पर लात मारने और वाहन रोककर हमला करने का आरोप; दूसरी ओर हरिद्वार जिलाधिकारी की बड़ी कार्रवाई—तीन शस्त्र लाइसेंस निलंबित/निरस्त**
देहरादून में दिव्य प्रताप सिंह का उत्पात उजागर
राजधानी देहरादून में भाजपा के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि दिव्य प्रताप सिंह ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन के साथ न सिर्फ मारपीट की, बल्कि पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी। यह मामला गंभीर तब हुआ जब घटना के दौरान उनके साथ मौजूद गनर द्वारा राष्ट्रीय ध्वज पर लात मारने का आरोप लगा।
राजपुर थाना पुलिस ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए दिव्य प्रताप सिंह और कांस्टेबल राजेश सिंह पर कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही घटना में इस्तेमाल बोलेरो वाहन को मौके से सीज भी कर लिया गया है, जबकि लैंड क्रूजर की लोकेशन पता की जा रही है। मामले के बाद गनर को निलंबित भी कर दिया गया है।
घटना कैसे शुरू हुई—ओवरटेक से शुरू हुआ विवाद
तहरीर के मुताबिक, आर. यशोवर्धन दिलाराम चौक से साई मंदिर की ओर जा रहे थे। रास्ते में पैसेफिक मॉल के पास एक कार ने उन्हें ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन सड़क संकरी होने के कारण वे साइड नहीं दे पाए। इसी बात पर पीछे आ रही कार सवार युवक भड़क गए।
मसूरी डायवर्जन पर पहुंचते ही एक सफेद लैंड क्रूजर और बोलेरो ने उनके वाहन को टक्कर मारकर रोक लिया। यशोवर्धन ने बताया कि मौके पर गनर ने उन्हें सड़क पर गिराकर लात-घूंसों से पीटा। वहीं, दूसरे युवक यानी दिव्य प्रताप सिंह ने उनके चालक को पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी।
इस घटना ने मामले को अत्यंत गंभीर बना दिया है, क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी इसी दौरान होने का आरोप है।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज; पुलिस की कई टीमें जांच में जुटीं
राजपुर थाना पुलिस ने मारपीट, धमकी, सड़क पर दुर्घटना पैदा करना, और हथियार प्रदर्शित कर भय उत्पन्न करने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। बोलेरो वाहन को सीज कर लिया गया है और लैंड क्रूजर की तलाश जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) स्वयं पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की बड़ी कार्रवाई

इस प्रकरण ने हरिद्वार प्रशासन को भी सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया। जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़ित और गवाहों के बयान तथा CCTV फुटेज के आधार पर स्पष्ट है कि घटना में दिव्य प्रताप सिंह द्वारा अपने लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग किया गया।
रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया कि दिव्य प्रताप ने वादी निशांत यादव के वाहन को रोककर मारपीट की और रिवॉल्वर/पिस्तौल दिखाकर डराया-धमकाया। इसी आधार पर मुकदमे में गंभीर धाराओं की बढ़ोतरी की गई, जिसमें धारा-126/352 बी.एन.एस. और धारा-30 आर्म्स एक्ट शामिल हैं।
जारी शस्त्र लाइसेंस और निरस्तीकरण का आदेश
दिव्य प्रताप सिंह के नाम जनपद हरिद्वार में निम्नलिखित तीन शस्त्र लाइसेंस जारी थे—
- रिवॉल्वर नं. 3107638 – 32 बोर (शस्त्र संख्या 2108/13)
- रिवॉल्वर नं. 75931 – 32 बोर (शस्त्र संख्या 1909/13)
- बंदूक नं. 148042 (शस्त्र संख्या 2104/13)
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पुलिस की आख्या का विस्तृत अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि अनुज्ञाधारी ने हथियारों के उपयोग से जुड़ी शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है। जनसाधारण की सुरक्षा को देखते हुए सभी तीनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित/निरस्त कर दिए गए।

DM ने दिए सख्त निर्देश
डीएम हरिद्वार ने एसएसपी देहरादून व एसएसपी हरिद्वार को निर्देश दिया है कि—
कारण बताओ नोटिस की प्रति अभियुक्त को तामील कराई जाए।
निलंबित लाइसेंसों से जुड़े शस्त्र तत्काल पुलिस अभिरक्षा में लिए जाएँ।
नोटिस की दूसरी प्रति समय-सीमा में डीएम कोर्ट को भेजी जाए।
इस पूरी प्रक्रिया को कड़ाई के साथ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके।
मामले में प्रशासनिक सख्ती जारी
हरिद्वार और देहरादून पुलिस मिलकर इस प्रकरण की जांच कर रही है। प्रशासन का रुख साफ है कि लाइसेंसी हथियारों का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और लाइसेंस प्राप्त शस्त्रों के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।