कांग्रेस महिला शक्ति ने संविधान दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया

संविधान दिवस कार्यक्रम का आयोजन
कांग्रेस महिला शक्ति ने संविधान दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला सदस्यों ने सहभागिता की। यह आयोजन कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती श्वेता सैनी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज के प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग करना था। महिलाओं की उपस्थिति और सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया।

संविधान की महत्ता पर विस्तृत चर्चा
कांग्रेस महिला शक्ति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष श्रीमती श्वेता सैनी ने संविधान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जो हर नागरिक को उसके मौलिक अधिकारों के साथ-साथ उसके कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संविधान ही वह आधार है, जिस पर लोकतंत्र की नींव टिकी है, और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाती है।

महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र की शक्ति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती सैनी ने यह भी कहा कि भारत के लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कांग्रेस महिला शक्ति की सभी सदस्याओं की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि महिला शक्ति समाज में एक नई ऊर्जा और जागरूकता फैला रही है। संविधान दिवस पर इस सामूहिक उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि महिलाएं भी संविधान के मूल्यों के संरक्षण में समान रूप से योगदान दे रही हैं।
विशिष्ट सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम बढ़ाया गौरव
कार्यक्रम में कांग्रेस महिला शक्ति की कई प्रमुख और सक्रिय सदस्याएँ उपस्थित रहीं। इनमें उपमा, रीता भाभर, शर्मिष्ठा, रेखा धिमान, शेहनाज़ बेगम, मोनिका जैन, सरोज जोशी और अन्दलीब इराम शामिल थीं। इन सभी सदस्याओं ने न सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि संविधान दिवस के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के माहौल को और अधिक सशक्त और प्रेरणादायक बनाया।

संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन
कार्यक्रम के दौरान महिला सदस्यों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया, जिसने पूरे माहौल को राष्ट्रभक्ति और संविधान सम्मान की भावना से सराबोर कर दिया। सामूहिक वाचन ने यह संदेश दिया कि संविधान केवल पढ़ने का दस्तावेज नहीं, बल्कि उसे समझना, अपनाना और उसे जीवन में लागू करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। संविधान दिवस पर यह सामूहिक वचन भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति महिला शक्ति की निष्ठा का प्रतीक बना।

राष्ट्रहित में समर्पण और सामाजिक सद्भाव का संकल्प
संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद सभी महिला सदस्यों ने राष्ट्रहित में समर्पित रहने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और संविधान द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह संकल्प केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि महिलाओं द्वारा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की वास्तविक भावना को दर्शाता था। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि वे संविधान के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कार्यक्रम का सफल समापन और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित महिलाओं का धन्यवाद किया गया। आयोजकगणों ने कहा कि संविधान दिवस जैसे अवसर नागरिकों को संविधान के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पुनः समझने का अवसर देते हैं। कांग्रेस महिला शक्ति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं के जागरूकता अभियान का सफल उदाहरण है, बल्कि समाज में संविधान की महत्ता को दोहराने का भी माध्यम बना। महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाएं भी बराबर की भागीदार हैं।
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