सहारनपुर में कैंसर और गंभीर बीमारियों का बढ़ता खतरा — विधानसभा समिति ने सख्त रुख अपनाया, जांच समिति के गठन के आदेश

दूषित जल और प्रदूषण से फैल रही घातक बीमारियाँ, सहारनपुर की स्थिति पर विधान सभा याचिका समिति ने जताई गहरी चिंता

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश — उत्तर प्रदेश विधान सभा की याचिका समिति की बैठक में सहारनपुर जनपद में बढ़ते कैंसर, किडनी और लीवर से जुड़ी बीमारियों पर गंभीर चिंता जताई गई। विधायक आशु मलिक द्वारा प्रस्तुत याचिका और उनके साक्ष्यों पर चर्चा करते हुए समिति ने इस मामले को "जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय" करार दिया और प्रमुख सचिव को तत्काल एक विशेष जांच समिति गठित करने के निर्देश जारी किए।

विधायक आशु मलिक ने समिति के समक्ष विस्तृत रूप से बताया कि सहारनपुर देहात के कई गांव, विशेष रूप से हिंडन और काली नदी के किनारे बसे क्षेत्र, पिछले कई वर्षों से दूषित जल और पर्यावरण प्रदूषण की चपेट में हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में टायर व तार जलाने, फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट और जहरीले पदार्थों के कारण हवा व पानी दोनों प्रदूषित हो चुके हैं। यह विषाक्तता धीरे-धीरे ग्रामीणों के शरीर में जा रही है, जिससे कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारियाँ चिंताजनक स्तर पर बढ़ रही हैं।

मलिक ने समिति को बताया कि यह समस्या नई नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने बार-बार विधानसभा में यह विषय उठाया, जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन जाँच के नाम पर अब तक केवल औपचारिकता निभाई गई है।” उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि सरकार ने पहले भी चिकित्सकीय और पर्यावरण विभागों को परीक्षण के आदेश दिए थे, किंतु किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँचा जा सका।

प्रभावित क्षेत्र और वास्तविक स्थिति

विधायक ने बताया कि हरोड़ा, मक्काबास, सलेमपुर भूकड़ी, घाना खंडी और आसपास के गाँव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन इलाकों में न केवल बुज़ुर्ग बल्कि युवा और बच्चे तक कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
उन्होंने समिति के समक्ष मुकर्रम (पूर्व प्रधान), राव नदीम, मोहम्मद इरफान पुत्र निसार और कई अन्य व्यक्तियों की असामयिक मृत्यु का ज़िक्र किया। विशेष रूप से एक चार वर्षीय बच्चे की कैंसर से हुई मौत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “यह केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी है।”

चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल

बैठक में विधायक ने सहारनपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दोनों में एमआरआई मशीन अब तक नहीं लग सकी है। कई बार टेंडर जारी हुए, मगर हर बार निरस्त कर दिए गए।
इस वजह से मरीजों को मेरठ, देहरादून या दिल्ली जाकर जांच करानी पड़ती है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का बोझ बढ़ता है।

समिति ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए मेडिकल कॉलेज में कैंसर विशेषज्ञों की स्थायी टीम तैनात करने और जिला अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाएँ शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

समिति के निर्णय और आगे की कार्रवाई

बैठक में यह तय किया गया कि:

दूषित जल और मिट्टी के नमूने लेकर प्रमाणिक लैब में जांच कराई जाए।

पर्यावरण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई जाए।

प्रभावित गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

पशुपालन विभाग भी दूध और अन्य उत्पादों की जांच कराए ताकि किसी अन्य माध्यम से संक्रमण न फैले।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में कार्यवाही नहीं होती है तो अगली बैठक में विधायकों की एक टीम प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण करेगी।

विधायक आशु मलिक का बयान

सुनवाई के बाद विधायक आशु मलिक ने कहा —
“यह सिर्फ मेरी विधानसभा की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों का मुद्दा है। पिछले कुछ महीनों में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और जिम्मेदार नागरिकों की मृत्यु इस बीमारी से हो चुकी है। मैं लगातार निगरानी रखूंगा ताकि यहां के लोगों को समय पर उपचार और सुरक्षा मिल सके।”

स्थानीय जनभावनाएँ और उम्मीद

जांच समिति के गठन के बाद स्थानीय निवासियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ईमानदारी से कार्रवाई करें, तो इस क्षेत्र को बीमारी की जकड़ से बाहर निकाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मत है कि अगर जल प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हें रोका जाए, और साथ ही आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को गाँव स्तर तक पहुँचाया जाए, तो आने वाले वर्षों में इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वर्तमान में सहारनपुर के ग्रामीण इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल है, लेकिन समिति की सक्रियता ने यह भरोसा दिलाया है कि अब इस गंभीर स्वास्थ्य संकट की अनदेखी नहीं की जाएगी।


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